Friday, November 22, 2024
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ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी जैसे संतों से मिलती है दायित्व, संघर्ष एवं कर्तव्य की प्रेरणा : के. के. कौशिक

by Newz Dex
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धर्मनगरी कुरुक्षेत्र ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी की तपस्थली है : के के कौशिक  

श्रीजयराम विद्यापीठ में ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी की 17वीं पुण्य तिथि पर दी गई श्रद्धापूर्वक श्रद्धांजलि 

मंत्रोच्चारण के साथ हुआ विद्यापीठ में पूजन एवं विशाल भंडारा 

देशभर में ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप महाराज ने शिक्षा, स्वास्थ्य, गौ संरक्षण, संस्कृत उत्थान की अनेकों संस्थाएं स्थापित की, धर्मनगरी

कुरुक्षेत्र के विकास में ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी का अहम योगदान  

न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर के तट पर स्थित श्री जयराम विद्यापीठ परिसर में देशभर में अनेकों संस्थाओं को स्थापित करने वाले त्यागमूर्ति ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज की 17वीं पुण्यतिथि पर जयराम संस्थाओं के ट्रस्टियों सहित नगर के गणमान्य नागरिकों, जयराम संस्कृत महाविद्यालय के विद्यार्थियों व ब्रह्मचारियों ने आस्था और श्रद्धा के साथ उनके तप स्थान व प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस से पहले मंत्रोच्चारण के साथ ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज की प्रतिमा के समक्ष ट्रस्टियों के. के. कौशिक एडवोकेट, पवन गर्ग, राजेश सिंगला, के. सी. रंगा व हरि सिंह इत्यादि ने विद्वान ब्राह्मणों एवं ब्रह्मचारियों के साथ पूजन किया एवं श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर के. के. कौशिक ने पूज्य गुरूदेव की स्मृति में विद्यापीठ में भण्डारा दिया।

उन्होंने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी का वास्तव में धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। कुरुक्षेत्र में गीता जयंती महोत्सव की शुरुआत भी उन्ही के द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र निर्माण के लिए यहां की जनता ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी की सदा ऋणी है। कौशिक ने कहाकि मनुष्य को दायित्व, संघर्ष, जिम्मेवारी एवं कर्तव्य की प्रेरणा ऐसे संतों से ही मिलती है। इस बात को ब्रह्मचारी जैसे संत में साबित भी किया है कि कड़े संघर्ष के बाद ही महान सफलता मिलती है। उन्होंने कहाकि देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी ने सदा समाज के हित के लिए कार्य किए।

उन्होंने कुरुक्षेत्र तथा देश के अन्य शहरों में अनेकों शिक्षण संस्थान स्थापित किए। उन्ही के मार्गदर्शन में यहां से संस्कृत का ज्ञान प्राप्त कर हजारों विद्यार्थी देश विदेश में संस्कृत के प्रचार प्रसार कर रहे हैं। कौशिक ने कहा कि कुरुक्षेत्र तो ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी की तपस्थली है। उन्ही की तपस्या के फलस्वरूप आज कुरुक्षेत्र का भव्य स्वरूप है। ब्रह्मचारी ने यहां की जनता को हमेशा समाजसेवा एवं सम्मान की प्रेरणा दी है। विद्यापीठ के ट्रस्टी एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पवन गर्ग ने कहा कि ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज संत ही नहीं वास्तव में दूर दृष्टि के भी स्वामी थे। यही कारण है कि धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के विकास में ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी का अहम योगदान है। आज जो कुरुक्षेत्र नव स्वरूप में नजर आता है। यह उन्हीं के प्रयासों का फल है।

राजेश सिंगला ने अपने सम्बोधन में कहाकि ब्रह्मचारी ने आश्रमों के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षण संस्थान व मेडिकल सेवाएं देने का काम किया। गीता की जन्मस्थली कुरुक्षेत्र में गीता जयंती महोत्सव के साथ आम जन को जोड़ने का कार्य उन्होंने करीब चार दशक पूर्व शुरू किया था। आज हर कुरुक्षेत्रवासी ही नहीं पुरे देश  के श्रद्धालु श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं। जयराम संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य रणबीर भारद्वाज ने कहा कि श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी अपने गुरु ब्रह्मलीन देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी के सपनों को साकार करने के लिए आज भी मिशन को लेकर दिन रात जुटे हुए हैं। इस अवसर पर विद्यापीठ में भंडारे में संतों, साधुओं, ब्रह्मचारियों, ट्रस्टियों, श्रद्धालुओं तथा नगर वासियों ने प्रसाद ग्रहण किया गया। इस अवसर पर आचार्य प. राजेश प्रसाद शास्त्री लेखवार, पुरुषोत्तम शास्त्री, रामपाल, राम जुहारी, विनोद कुमार, जितेंद्र शर्मा, कमल, दीपक इत्यादि ने भी श्रद्धांजलि दी। 

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