तू है मोहन मेरा, मैं दीवाना तेरा जैसे मधुर भजनों को सुन श्रद्धालु हुए भाव विभोर
एनडी हिन्दुस्तान
चंडीगढ़। सेक्टर 23 डी स्थित श्री महावीर मंदिर मुनि सभा (साधु आश्रम) में 56वें वार्षिक मूर्ति स्थापना समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन एक ओर जहाँ भगवान को भावपूर्वक 56 व्यंजनों का भोग लगाया वहीं दूसरी ओर कथा व्यास आचार्य श्री हरिजी महाराज ने श्रद्धालुओं को इससे संबंधित प्रसंग और श्री कृष्ण-रुक्मणी विवाह की कथा सुनाई। आचार्य श्री ने कहा कि भगवान भक्त के अधीन होते हैं। भक्त जैसे होते हैं, भगवान वैसे ही बन जाते हैं।
इस अवसर पर आयोजकों द्वारा श्री कृष्ण-रुक्मणी विवाह की जीवंत झांकी का आयोजन किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु अत्यंत आनंदित हुए। विवाह समारोह के दौरान श्रद्धालुओं ने नृत्य किया और जयकारों से वातावरण को गूंजायमान कर दिया। आचार्य श्री ने नवधा भक्ति के महत्व को बताते हुए कहा कि रुक्मणी जी ने भगवान श्री कृष्ण को सिर्फ श्रवण भक्ति के माध्यम से अपना बनाया।
विवाह समारोह में सभी श्रद्धालुओं ने पूरे भाव से भगवान के नाम का सुमिरन किया और विवाह की धूमधाम में जयकारे लगाए। इस और पुष्प वर्षा की और संयुक्त रूप से भगवान की आरती की।
कथा के दौरान आचार्य श्री हरिजी महाराज ने भजनों के माध्यम से सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध किया।